कभी-कभी दोस्त भी इश्क़ बन जाते हैं…
ना नाम होता है उस रिश्ते का, ना परिभाषा…
बस एक एहसास होता है, जो रगों में उतर जाता है।
तू मेरी ज़िंदगी का वही खास हिस्सा है,
जिसके बिना सब अधूरा लगता है।
तेरी बातें… तेरा चैट करना…
वो छोटी-छोटी बातें जिनमें दिन बीत जाता था…
आज भी यादें बन कर दिल में धड़कती हैं।
कितनी बार दिल चाहा —
बस तेरा हाथ थाम लूँ…
तेरे पास बैठकर कुछ नहीं भी कहूँ,
फिर भी सब कुछ कह जाऊँ।
तेरे हर दर्द में साथ दूँ,
तेरे हर ख़ुशी में मुस्कुरा सकूँ…
तेरे हर आँसू को अपने सीने में छुपा लूँ।
तू शायद अब पास नहीं,
पर मेरी रूह में बसी है।
तेरे बिना, बहुत कुछ है मेरे पास…
पर सब अधूरा लगता है।
कभी-कभी लगता है बस एक बार फिर से…
तेरे पास आ जाऊँ,
वो पुराना रिश्ता, वो सुकून फिर से जी लूँ…
तुझमें खुद को फिर से ढूंढ लूं।
"तेरी दोस्ती सिर्फ़ याद नहीं… मेरी ज़रूरत है।"

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